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Chocolate -Novel _pandey bechan sharma

  अक्सर कहा जाता है कि प्रेम का कोई तट नहीं होता। वह सरहदों, दायरों और परिभाषाओं से परे बहता है। फिर भी, प्रेम मानव इतिहास में सबसे अधिक विवादों, बहसों और सामाजिक पहचानों का केंद्र रहा है। प्रेम केवल मन का एक सहज भाव नहीं, बल्कि समाज द्वारा रची गई असंख्य सीमाओं—जाति, वर्ग, लिंग और परंपराओं—के ताने-बाने से उलझा हुआ अनुभव है। औपनिवेशिक युग के आगमन ने इस उलझन को और गहरा कर दिया। विक्टोरियन नैतिकताओं और कठोर ब्रिटिश कानूनों ने भारतीय समाज में समान-लिंगी प्रेम को पाप, अपराध और लज्जा के आवरण में ढक दिया। धीरे-धीरे वह विविध, प्रवाहमान, स्वाभाविक यौन-संवेदनाएँ, जो पूर्व-औपनिवेशिक भारत में अनेक रूपों में खुलकर साँस लेती थीं, अंग्रेज़ी शासन के दवाब में ‘विकृति’ और ‘हीनता’ के रूप में आरोपित की जाने लगीं। इसी कड़ी में भारतीय पुरुषत्व भी पश्चिमी आदर्शों की कसौटी पर कसकर नया रूप लेने को विवश हुआ। इन परिवर्तनों की गूँज साहित्य में भी सुनाई दी, ख़ासकर उस समय जब स्वतंत्रता का सपना आकार ले रहा था। हिंदी साहित्य में समलैंगिकता पर विचार की बात हो और बचन शर्मा ‘उग्र’ का चाकलेट उसमें न आए—यह संभव नह...

इश्क में नदी -कविता संग्रह

“सतसईया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर  देखन में छोटे लगे, घाव करत गंभीर” मतलब है जो आकार में छोटा है  वह गहरा घाव कर देता है। ठीक इसी प्रकार अमित कुमार जी  द्वारा लिखित ‘इश्क में नदी’ संग्रह में सम्मिलित कविताएं, सरलतम शब्दावली में , छोटे आकार में होने के बावजूद भी  अर्थ शक्ति और काव्य सुंदरता की दृष्टि में देखे तो अद्वितीय है। प्रस्तुत संग्रह में खुद कवि ने लिखा है- “ये कविताएँ छोटी है, लेकिन इनमें से अधिकतर बहुत प्रभावी है, जो जीवन को देखने का एक अलग नज़रिया देती है, जीवन के कई आयाम दिखाती है।“ उनकी कविताएं एकाँकी और कोमल हृदयों को छूती है। कविता संग्रह के अध्ययन करते वक्त मुझे लगा कि प्रत्येक कविता जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को कागज़ में उतारने की विनम्र कोशिश है। शीर्षक को सार्थकता देते  हुए अमित जी की इस कविताओं के केंद्र में प्रेम है। मुख्य रूप से प्रेम के  दो पक्ष हैं  - संयोग पक्ष और वियोग पक्ष। वियोग दुखदायी जरूर है। पंत के अनुसार “वियोगी होगा पहला कवि / आह से उपजा होगा गान/” इसको सार्थक बनाते हुए उन्होंने  ‘तुम्हारे पत्र’ नामक कविता में ...